Tuesday, 27 March 2018

वो इक शाख पर बैठा कबूतर ढूंढ़ रहा है

वो इक शाख पर बैठा कबूतर ढूंढ़ रहा है
डालकर दाने जो पंख काट ले वो कहां है

आती है ख़ुशबू सुबह में भीगे गेसुओं की
सनम कहीं दिखा नहीं सिर्फ़ चाय यहां है

मिल जाएं बिखरे पड़े मोती कहीं रेत पर
मान लो मुहब्बत में अब तो समंदर वहां है

टोकता है वाइज़ रोज़ मैखानें में आने से
मस्ज़िद के बंदे को क्या पता ख़ुदा कहां है

रहता है टेबल खाली आज कल शेख़ का
सुने कौन नमाज़ी सा वहीं सोज़-ए-निहाँ है

- उदयन गोहिल

सोज़-ए-निहाँ ~ छुपी हुई जलन

Saturday, 24 March 2018

भरो गिलास में और सामने रखो उसे

भरो गिलास में और सामने रखो उसे
ये मौत,  जाम से  कुछ ज़्यादा नहीं है

उड़ जाएगा पंछी पिंजरे से निकल के
वापिसी का उसका कोई वादा नहीं है

ये क्या बला है तुम सोचते हो हर बात
दिल है, किसी का आना जाना नहीं है

गया है  मुंह फेर कर वो,  तो जाने दो
फ़िर से देखने का कोई इरादा नहीं है

पूछ लूं, खैरियत तुम्हारी आज  अभी
कह सकते हो, ये दिल लगाना नहीं है

और हो कभी ज़हन में तो आ जाना
हूं इंतज़ार में, मेरा कोई ज़माना नहीं है

- उदयन गोहिल

તદ્દન ખોટો પ્રચાર ને લૂંટવાની અનોખી રીત છે

તદ્દન ખોટો પ્રચાર ને લૂંટવાની અનોખી રીત છે ,
મળી કોક દી સાંઈને તો પૂછો પૈસા સાથે પ્રીત છે !

છે વિસ્તરેલું બ્રહ્માંડ નોખી - નોખી અદાઓ માં ,
મુરત ખુદાની માનવ સમી, આ આપણી જીત છે !

છે શબ્દ જ શબ્દ બધે, ખાલીપો ખર્ચાઈ ગયો ,
હોય લાગણી મૌનમાં ગૂંથેલી, એવું કોઈ ગીત છે !

ઢાળીને નયન સામસામા આખો પ્રેમગ્રંથ રચાય ,
હવે કો જરા પ્રેમપંથ પર તમારો કોણ મનમિત છે !

પાઈ  થીટા  આલ્ફા  બીટા મને સમજાતા નથી ,
ફાવે મને  બે ને બે ચાર, આ કંઈ કાચું ગણિત છે !

ફર્યા કેટલાં અને બાકી કેટલાં આ હિસાબ ક્યાં ,
ને ચોર્યાસી લાખે થોભશું કે સંધુય અગણિત છે !

- ઉદયન ગોહિલ

Sunday, 4 February 2018

दिया जलता वो मेज़ पर छोड़ गया

दिया जलता वो मेज़ पर छोड़ गया
सफ़र बाहर का भीतर में मोड़ गया

ले आया क़िताब कोरी सूफ़ी मेरे लिएं
जाते - जाते और पन्ने दो जोड़ गया

था रिवाज़ उसके यहां छोड़ जाने का
ना बदला मैं जब वो दिल तोड़ गया

ले लेगी मौत छीनकर के सब मुझ से
उससे पहले मैं ज़िंदगी निचोड़ गया

है ख़ुदा और वो भी कायनात से जुदा
खयाल ऐसे अपने हाथों मरोड़ गया

- उदयन गोहिल

Saturday, 30 December 2017

जिंदगी तनहा सफर की रात है

जिंदगी तनहा सफर की रात है
जाग फकीरा कहां तेरी ज़ात है

मिल जायेंगें कई ख़ुदा यहां
देख ग़ौर से सूफ़ी कि जमात है

ढूंढता है मुहब्बत वो दूजे में
है नहीं तो दे कैसे ये इस्बात है

कोई दिया बुझा के तुम्हें कहूं
रोशनी से जुड़े ये हालात है

है कत्ल का इल्ज़ाम उसी पे
वहीं आंखों की इत्ती सी बात है

- उदयन गोहिल

इस्बात ~ प्रमाण

Monday, 18 December 2017

कहते हो तुम वैसे नज़र आएं क्यूं

कहते हो तुम  वैसे  नज़र आएं क्यूं
अपने आप को  सब से  बचाएं क्यूं

है मुहब्बत गर  तो दिखा दो खुलके
खा म खा  ये गुलाब  तुम लाएं क्यूं

तय है  जाना  ये  जहां से  इक दिन
ये  इंट - पत्थरों से  घर  सजाएं क्यूं

कब तलक  रहेगा  ये  दिया  रोशन
भला  पहले से  ख़ुदा ये बताएं क्यूं

रहते हो  मरे - मरे  पूरी  ज़िंदगी तो
अलग से  जनाजा  फिर उठाएं क्यूं

और  ख़ता  हम से ही  हुई थी क्या
हर  मुलाकात पे  वो  गिनवाए क्यूं

वैसे  कुछ  कहते  नहीं  मिलने  पर
आज   गीत  प्यारा  गुनगुनाएं  क्यूं

- उदयन गोहिल

Saturday, 18 November 2017

કઈ વિચારું તારા વિશે

કઈ વિચારું તારા વિશે  એવો મને વિચાર આવ્યો
દીવાનગીની મૌસમમાં શબ્દોની કાઢી ધાર લાવ્યો

એક આહ નીકળી પે'લાં  ને પાછળ  તારો ખયાલ
છે તું તો છે અર્થ, બાકી શબ્દે શબ્દે ખૂંવાર કાવ્યો

ને ઝુકાવી મસ્તક, તુજ પ્રેમ-લાગણીની વાતમાં
બની બાળક, મા ના પ્રેમને  મેં અનરાધાર ધાવ્યો

મુલાકાતને સમય સાથે સાંકળવી બે મતલબ છે
એણે તો બસ  એક ત્રાંસી નજરે ઈકરાર જતાવ્યો

કેટલી વાતો માનશો, એ તમારા પર છે  'ઉદયન'
ગીત - ગઝલમાં ઈશારો સનમે વારંવાર બતાવ્યો

- ઉદયન