Friday, 31 March 2017

तेरी नज़रों ने आज सवाल किया

तेरी  नज़रों   ने   आज   सवाल   किया
नज़रों  की  गुफ्तगू  में  इकबाल  किया

बे सबब   मुस्कुराकर  देख  क्या  लिया
हमारे   अल्फ़ाजों   ने   कमाल   किया

है  शाम  आधी   और   रात  भी  आधी
वक्त  को   रोकने  का   ख़याल   किया

जूल्फ़   बिखेर   आप   नज़दीक  आएं
तो   आपके   हुस्न   ने   बबाल   किया

रंग   गोरा    नैन   मस्त    नक़्श   अदा
खुद    ही     खुद   में    जमाल   किया

खुब    नज़दीक     रहा    वो    'उदयन'
खुद   को    हमने   न    बहाल   किया

- उदयन

Saturday, 25 March 2017

તમે આમ પાછા વળી જશો

તમે આમ  પાછા વળી જશો તે કેમ ચાલશે
અધુરી મુલાકાત ના ડંખ  જોબનિયે વાગશે

ને મહોબ્બત  ફતવો તો છે નહીં મૌલવી નો
કે નઝરોથી ઘેરાઈ ને તમને અકબંધ રાખશે

કહું છું,  માંડો મોકાણ એક પૂર્ણ મિલન ની
પછી ઉઠે સોડમ  નખશીખ તમને ય ફાવશે

યાદ હોય કદાચ, નહીંતો થોડુંક જોર નાખો
આંખોના મેળાપનો રંગ તમને પાકટ લાગશે

ને કઈ કહું તો અર્થ માં ન ઉમેરાશે 'ઉદયન'
હવે જો સનમમાં જાણે બધાં શું શું ભાળશે

- ઉદયન

Thursday, 23 March 2017

સનમ

કલમ નો કોઈ એક તાજો શેર સંભળાવો
ને આ રીતે તમે તમારી સનમ ને મમળાવો

- ઉદયન

ને હું કહેતો તો કે મળશે ક્યારેક સનમ
એ  વાત પર  ખુદા ને  ખોજવાનું રહી ગયું
ને એક સહજ વાત હતી, તને ચાહું છું
હાથ જાલી, કે'વું કેમ વિચારવાનું રહી ગયું

- ઉદયન

Saturday, 18 March 2017

सनम - 2 Line

जहां में दो ही काम हमारे नसीब ने दिखाएं
हम सनमखाने पर जाएं सनम निकल आएं

- उदयन

फिर कहीं से उड़कर आ गएं वो खुश्बू के गोले
फिर कहीं सनम ने जूल्फ़ें बिखेरी हो होले होले

- उदयन

हर जवानी का एक मौसम होता है
माना किसीका ज्यादा तो किसीका कम होता है
मेरे तजुर्बे के  सवाल न पुछो मियां
बिस्तर की सिलवटों में कहां नरम सनम होता है

- उदयन

वुज़ू मेरी मयकशी है  साकी मेरा सनम
है मुहब्बत मुझे तुझसे, ख़ूदा मेरा भरम

- उदयन

एक पहेली में तुम्हें  कुछ राज़ देता हूँ
कहकर सनम मैं सुफी सलाम देता हूँ

- उदयन

चूडियाँ  बिंदी  मेहंदी  कपड़ें, श्रृंगार जाने किस काम का
फिर क्या क्या शौक सनम को बेहिस-ओ-बद-हवास का

- उदयन

बेहिस-ओ-बद-हवास - paradise of youth

हश्र की बात पर फिर वो मुझसे जुदा निकला
वो सनम तो ख़ुदा और मैं इंसान वो मेरी बला

- उदयन

जवाब  कुछ भी दूं  वो  इक मिसाल होगी
बात तो वही है फिर सनम बेमिसाल होगी

- उदयन

एक  नशा है  तेरी  हर अदा में
याद आयी सनम मुझे कज़ा में

- उदयन

शाम के तारे दिख रहे है तुम निकल जाओ
साकी रह गया पीछे सनम तुम इधर आओ

- उदयन

बेज़िजक कु़र्बान कर दिया खूद को 'उदयन' ने सनम पर
है आरजू ओ दिलकशी ओ करम आपका इस जनम पर

- उदयन

थे लफ्ज़  किसी के लिये  किसी के लिये ग़ज़ल थी
अखबार में वो दागदार हुई कभी जो मेरी सनम थी

- उदयन

बांध कमंदोमें दूर मयखानों से मुझे क्या फायदा
वुज़ू-ओ-नमाज-ओ-सनम से मेरा ताल्लुकात है

- उदयन

कमंद ~ फंदा

चाहत के सलीके से  अभी तु थोडा दूर बसा है
इसीलिए सनम ओ ख़ूदा के बीच फंसा पडा है
चाहता है मुझे  उसके नज़रीयें से  देख लो मुझे
चश्म-ओ-चिराग में कहीं उदयन का ज़ाहिरा है

- उदयन

धडकनों के बीच एक ठहराव जड़ा रखा है
दुनियां के घावों से दूर, सनम खड़ा रखा है

- उदयन

ख़ामख़ाह इल्ज़ाम मेरे सर आता है
सनम लफ्ज़, जब दिल को भाता है

- उदयन

थोडा तुझमें बसा है थोडा मुझमें बसा है
सनम ही है हम में, जो पसंदीदा सजा है

- उदयन

थोडा दूर सनम है रात जवां हो रही है
होकर यहां, मैं यहां न रहा, वो यहीं है

- उदयन

बेनज़ीर  मेरा  सनम  यहां  बाहें  फैलाएं  खड़ा हो
इधर मोहब्बत जवां उधर फ़िरदौस खाली पडा हो

- उदयन

दिलो में नशा व आँखों में सुकून था
सनमखाने का  इतना सा उसूल था
ढूँढता है कोई मय में, कोई सनम में
पाक नज़र में वो ख़ूदा का रसूल था

- उदयन

फिर  वो नक़ाब सरकायें  फिर  वो जमाल-ए-रोशनी
फिर वो मुहब्बत का आलम फिर वो सनम-ए-बंदगी

- उदयन

चलो, फिर आज महफिल जमाएं
सनम को मेरे अल्फ़ाज में सजाएं

- उदयन

चलो आज फिर महफिल सजायी जाएं
जमाने को  फिर  सनम  दिखायी  जाएं

- उदयन

चलो,  कुछ राज़ दिल के मैं खोलता हूँ,  तुम भी  खोल दो
हो सनम तुम मेरी मोहब्बत के मजार का, तुम भी बोल दो

- उदयन

उम्र के साथ जन्नत का पता बदलता गया
अब के हालात में सनम से लिपटता गया

- उदयन

गर थी, कोई बात, बीच दोनों के तो मोहब्बत थी
और है अब, जो दरमियाँ  वो अजान-ए-सनम है

- उदयन

तकाज़ा है मोहब्बत-ए- बंदगी का उदयन
सनम है,  सनम था और  सनम ही  रहेगा

- उदयन

सनम तेरा इक उधर है तो इक मेरा सनम इधर है
बात दिलों में यह महफूूज है, जो, जहां, जिधर है

- उदयन

शाम रात मय चाँद सखी सनम
बेपरदा उदयन बदनाम हो गया

- उदयन

वो  चाँद ही क्या, छिप  छिपाता चले
मिल मेरे सनम से, चाँद जलाता चले

- उदयन

कुबूल है कुबूल है कुबूल है
सनम, पसंदीदा मकबूल है

- उदयन

फिर वहीं बात तन्हा रात बिखरे ज़ज्बात
बगैर सनम, करे क्या ये दिवाने की जात

- उदयन

हलकी सी आह होती है मीठी सी चूभन होती है
रतजगा  दिदार-ए-सनम की एक तलब होती है

- उदयन

नहीं रहूँगा कभी मैं तो लफ़्ज मेरे गुंजेगें
बगैर तेरे, दूनियावालें सनम कहां ढूंढेगे

- उदयन

कहां गया वो सनम  जो मेरे साथ चलता था
रहता था दूर, फिर भी आसपास संवरता था

- उदयन

ये हवा  न जाने  कहां से खुश्बू ले आयी
भीगे गेंसूओंं में सनम मुझे मिलने आयी

- उदयन

जहां एक मेरा, मैने ख़ूद बनाया है
सनमखाने में मेरे, तुम्हें बिठाया है

- उदयन

तवज्जों नहीं दिया दूनिया-ए-ज़ालिम ने कभी
वो कोई ओर मिट्टी का था  जो सनम हो गया

- उदयन

कलम से निकले अल्फ़ाजों ने एक तस्वीर बना दी
तस्वीर से  निकलती महक ने  मुझे सनम थमा दी

- उदयन

मिजाज़ पर मेरे जाने किसका साया है
शाम   लफ़्जों   पर   सनम   छाया   है

- उदयन

फरक नही रहता जब मैं सनम कहता
दिल से जान तक  बस  तु ही तु रहता

- उदयन

और तो क्या कहूँ, चाँद को समझा दो
या फिर कह दो, सनम को, बहला दो

- उदयन

एक  चाँद, सिर  पर  आ  गया  है
और  सनम,  संवरना भूल गया है

- उदयन

ख़याल बेपरवाह सा  उमड़ रहा है
हाँ, सनम ख़ूदा है तो ख़ूदा कहाँ है

- उदयन

था इंतज़ार मेरा, जो रहते रहते  जवां हो गया
कहते है चाँद, जो रात को मेरा सनम हो गया

- उदयन

Friday, 17 March 2017

कैमरा

खुदा को  कैद कर लियां मैनें
दिल-ए-क्लिक-ओ-कैमरा में

- उदयन

कैमरे से खेलने की खूब अदा है
तस्वीर पे उनकी कितने फ़िदा है

- उदयन

અચાનક આંગણે

અચાનક આંગણે આજ એક આગંતુક આવી
હળવે હળવે હથેળીની હસ્તરેખામાં હરખાયી

પ્રીતનું  પાનેતર પહેરી  પૂજનની પ્યાસ  પાળી
અકારણ અનાયાસે અદકેરી એ આસ આવી

ભોળાના ભજને  ભજતી  ભક્તાણી  ભાળી
રીઝવવા રબને રાતીચોળ રાખની રસમ રાખી

ફરી ફરી ફોગટમાં  ફર ફર ફરતી  ફોરમ ફળી
મહેક માટીની મહેકતી મળે, મુજને માં મળી

- ઉદયન

યાદો તાઝી કરું છું

યાદો તાઝી કરું છું ફરી, તને રાઝી કરવાની
કરેલા ગતકડા નાદાન, ઈચ્છા તને જોવાની

ચાવી કાઢી સ્કુટર ની કેટ કેટલી કીકો મારી
તારા ઘરની સામે ઉભો, ઈચ્છા તને જોવાની

સાયકલ ની  ચેન ઉતારી  પેડલ ઉંધા માર્યા
બન્યો હું ગેરેજવાળો, ઈચ્છા તને જોવાની

વાધરી વગરના બુટમાં, વાધરીઓ  મેં બાંધી
ઉભો રહ્યો  અડગ  હું, ઈચ્છા તને જોવાની

શું સમજે આ બધું આજના જુવાનીયાઓ
વાત ન થાય ભલે પણ, ઈચ્છા તને જોવાની

આજે  પણ  બેશક  હું  કહી  શકું  'ઉદયન'
એ નિખાલસ પ્રેમ હતો, ઈચ્છા તને જોવાની

- ઉદયન